कुछ तो होगा

 कुछ तो होगा


शक पर पीट पीट कर मार डाला

एक मुस्लिम को

मैंने दुख जताया तो

फटकार मिली कि तुम्हें क्या

मॉब लिचिंग थी,

उसके पीछे

कुछ तो होगा।


दो साधुओं को भी शक पर 

पीट पीट कर मार डाला

मैंने दुख जताया

नसीहत मिली कि तुम्हें क्या

बच्चे उठाने वाले थे

उसके पीछे

कुछ तो होगा।


अब फादर को शक पर  कैद कर

कैदखाने में बीमारी ने मार डाला

उपदेश नहीं मिला

कि तुम्हें क्या,

आतंकवादी समझे गए,

फिर भी

कुछ तो होगा।


मैं उपदेश के इंतजार में

मौन बैठा हूँ।


                            सत्येंद्र सिंह


Comments

  1. बधाई स्वीकार करें। आगे डालते रहे। यह आपका वेब पेज है।रोज़ डालिए।

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  2. बहुत सुंदर.... यात्रा जारी रहे....

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  3. बहुत मार्मिक , सब देखकर भी मैं मौन हूँ। (कैसी अनकही व्यथा है) नमस्कार (सार्थक सुंदर गंभीर रचना)

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  4. मार्मिक रचना!

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  5. बहुत ही मार्मिक 👌🙏

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