कुछ तो होगा
कुछ तो होगा
शक पर पीट पीट कर मार डाला
एक मुस्लिम को
मैंने दुख जताया तो
फटकार मिली कि तुम्हें क्या
मॉब लिचिंग थी,
उसके पीछे
कुछ तो होगा।
दो साधुओं को भी शक पर
पीट पीट कर मार डाला
मैंने दुख जताया
नसीहत मिली कि तुम्हें क्या
बच्चे उठाने वाले थे
उसके पीछे
कुछ तो होगा।
अब फादर को शक पर कैद कर
कैदखाने में बीमारी ने मार डाला
उपदेश नहीं मिला
कि तुम्हें क्या,
आतंकवादी समझे गए,
फिर भी
कुछ तो होगा।
मैं उपदेश के इंतजार में
मौन बैठा हूँ।
सत्येंद्र सिंह
बधाई स्वीकार करें। आगे डालते रहे। यह आपका वेब पेज है।रोज़ डालिए।
ReplyDeleteधन्यवाद जी।
Deleteबहुत सुंदर.... यात्रा जारी रहे....
ReplyDeleteधन्यवाद जी।
ReplyDeleteबहुत मार्मिक , सब देखकर भी मैं मौन हूँ। (कैसी अनकही व्यथा है) नमस्कार (सार्थक सुंदर गंभीर रचना)
ReplyDeleteधन्यवाद मैडम
DeleteThis comment has been removed by the author.
Deleteधन्यवाद जी।
DeleteVery nice 👌 👌👌👌
ReplyDeleteधन्यवाद
Deleteमार्मिक रचना!
ReplyDeleteधन्यवाद
Deleteबहुत ही मार्मिक 👌🙏
ReplyDeleteअति सुन्दर
ReplyDeleteधन्यवाद
ReplyDeleteधन्यवाद
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