जल संकट
पुणे में फरबरी 2025 में ही गर्मी इतनी पड़ रही है और आसपास के क्षेत्र में जल स्तर गिरता जा रहा है। घरों में जो पुणे महानगरपालिका का पानी आता है वह बहुत कम प्रैशर से आ रहा है। मैं अपनी सोसायटी का चेयरमैन हूँ और लोग मेरे पास पानी कम प्रैशर से आने की शिकायत करते हैं। मैं पानी सप्लाई करने वाले ऑपरेटर से बात करता हूँ। वह बताते हैं कि वे अपनी ओर से पूरा पानी खोलते हैं लेकिन प्रैशर कम क्यों है इसके लिए कुछ नहीं कर सकते।
हमारे क्षेत्र के समाज सेवक हैं प्रसाद जगताप जो पहले आंबेगांव खुर्द ग्रामपंचायत के सदस्य थे और अब नगर सेवक के उम्मीदवार हैं। उन्होंने हमारे क्षेत्र में पानी लाने, ड्रेनेज डलवाने और रोड बनवाने की दिशा में बहुत उल्लेखनीय कार्य किया है। इसलिए आज मैंने वाट्सएप पर प्रैशर कम आने के बारे में लिखा है। पुणे महानगरपालिका की ओर से वाट्सएप मोबाइल नंबर जारी किया है जिस पर सारी शिकायतें की जा सकती हैं। ऐसे ही महाराष्ट्र राज्य बिजली बोर्ड ने भी ऐसा नंबर जारी किया है। मैं दोनों पर हिंदी में शिकायत दर्ज करता हूँ और उन पर कार्रवाई भी होती है।
लेकिन कचरा एक बड़ी समस्या बना हुआ है। हमारी सोसायटी में कचरा लेने के लिए एक प्राइवेट गाड़ी आती है जो हर बंगले से एक सौ रुपए लेती है। कुछ लोग हैं जो पैसे नहीं देते और कचरा भी नहीं डालते। परंतु समस्या यह नहीं है। समस्या यह कि सोसायटी से बाहर जाने वाले रास्ते पर पता नहीं कौन लोग कचरा डाल जाते हैं। प्लास्टिक की बड़ी बड़ी थैलियां रोड पर कचरा उगलती रहती हैं। दस पंद्रह दिन में महानगरपालिका के कर्मचारी कचरा उठा लेते हैं पर यह कचरा समस्या का समाधान नहीं है। लोगों की मानसिकता बदलनी चाहिए और स्वच्छ शहर बनाए रखने की भावना आनी चाहिए। आज यह जानकार बहुत खुशी हुई कि निरंकारी सत्संग मिशन के लाखों अनुयायी नदियों की सफाई में जुट गए हैं
डॉ सत्येंद्र सिंह
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