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Showing posts from December, 2024

चिंता

किसान परिवार पूरा, मेहनत करता जाए, न लागत मिलती न मेहनत का फल पाए। खेत और बागान से, सबका भरता है पेट, पैसे वाले के पेट भरे, किसान का खाली पेट। सीताफल अमरूद सड़ रहा देखे सारा देश, कृषक उजाड़े बाग़ सब, बाँध खाली पेट। सबको चिंता व्यापती केवल शब्दन माँहि, घर में खावें चूपडी  बाहर फिकर जताहिं। आटा रुपए पचास का, मिलता बीच बजार, भाजी पाला कीट संग, दालें बिकें हैं सौ पार। शंकर राम घनश्याम तुम दीनों के हो करतार, किरपा कर पेट भर दीजिए सबके पालनहार।               सत्येंद्र सिंह, पुणे, महाराष्ट्र 

लघुकथा

  लघुकथा :                     अनदेखी      बाबू रामदयाल सक्सेना पुणे में घूमने आए ।  यहाँ के दर्शनीय स्थल व मौसम उन्हें बहुत अच्छा लगा। उन्हें सिटी बस सेवा भी बहुत अच्छी लगी। बहुत कम पैसों में एक कोने से दूसरे कोने तक जा सकते हैं। उन्हें पता चला कि स्वारगेट और कात्रज के बीच सिटी बस के अलग रोड है जिस केवल बस चलती है और बस स्टॉप भी उस रोड पर अंदर ही बने हैं और बस के दरवाजे बीच में बस स्टॉप पर ही खुलते हैं। एकदम सुरक्षित यात्रा। इसे बीआरटी लाइन कहते हैं। निजी वाहन इस बीआरटी लाइन के इधर उधर चलते हैं और इस लाइन में नहीं आते। एक दिन वे स्वारगेट से कात्रज की ओर उसी रूट पर चले। बस में चढे , ड्रायवर के पीछे सीनियर सिटीजन के लिए आरक्षित सीट मिल गई। वे उस सीट पर बैठे जहाँ से सामने आने जाने वाले वाहन दिखाई दे रहे थे।  उन्होंने देखा कि सामने से दांई ओर एक बस आ रही है और अचानक उस बस को ओवरटेक करके एक मोटर साइकिल पर तीन लड़के विपरीत दिशा से उनकी बस की दौड़े चले आ रहे हैं...