पं.रामकिंकर उपाध्याय

 पं. रामकिंकर उपाध्याय, मानस मार्तंड, रामायण व रामचरित मानस के लब्धप्रसिद्ध प्रवचनकार, श्रीकृष्ण-जन्मस्थान-सेवासंघ के अनुरोध पर श्री कृष्ण जन्मभूमि मथुरा में प्रवचन करने आते थे। कभी एक सप्ताह के लिए तो कभी दो सप्ताह के लिए, परंतु उनकी विशेषता यह थी कि पूरे समय एक ही पात्र पर प्रवचन करते थे जैसे हनुमान जी, प्रभु रामचंद्र, सीता जी, एक सप्ताह या दो सप्ताह एक ही पात्र पर बोलते थे और वेद, उपनिषद, पुराण आदि से उद्धरण दिया करते। सुनने वाले अभिभूत सुनते रहते। उनसे अच्छा रामायण प्रवचनकार मैंने अपने जीवन में नहीं देखा न सुना। करपात्री जी का नाम सुना था परंतु उनके प्रवचन सुनने का कभी सौभाग्य प्राप्त नहीं हुआ।

उपाध्याय जी को सुनने का सौभाग्य भी इसलिए मिल सका क्योंकि मैं उदरपूर्ति के श्रीकृष्ण-जन्मस्थान-सेवासंघ में बतौर टंकक लिपिक काम करता था। एक बार ऐसा हुआ कि मैं आर अम एस में डाक डालकर जन्मभूमि लौट रहा था कि पं उपाध्याय जी बाज़ार में टहलते हुए मिल गए। वे प्रवचन के लिए पूजा करने से पहले एक दो घंटे अकेले टहलते थे। मैंने उनके सामने साइकिल रोकी, साइकिल से उतरा और उनसे कहा कि पंडित जी आपसे कुछ बात करना चाहता हूँ क्योंकि जन्मभूमि पर तो समय मिलता नहीं। उन्होंने कहा कि चलो कहीं बैठते हैं। डैंपियर पार्क का घास भरा मैदान बाजू में था तो आदमी निकलने वाले टेढ़ी जगह से ऊपर मैंने साइकिल उठाई और पार्क में अंदर प्रवेश कर गया। पंडित जी भी आ गए। हम दोनों एक बैंच पर बैठ गए। उन्होंने कहा, पूछो क्या पूछना है?

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