सकार

 मैं एक उद्योगपति का स्टेनो था। मुझे डिक्टेशन में बोला जाता कि हुंडी सकार ली गई है, परंतु मैं सकार को कभी समझ नहीं पाया। यह सकार शब्द हिंदी का है, उर्दू का है या संस्कृत का, नहीं जानता था और न आज जानता हूँ। लेकिन, कुछ दिनों से सकारात्मक और नकारात्मक सोच जैसे शब्दों के बहु प्रयोग से यही समझ में आता है कि सकार स्वीकार के लिए और नकार अस्वीकार के लिए है। परंतु हुंडी सकारने का अर्थ अलग ही था, ऐसा मैं आज भी मानता हूँ परंतु सच में समझता नहीं।

      आजकल हिंदी साहित्य में देख रहा हूँ - सकारात्मक कहानी या कविता। मेरी समझ में तो यही आता है कि सकारात्मक अंग्रेजी शब्द पॉजिटिव का अर्थ है और नकारात्मक नेगेटिव का। परंतु हुंडी सकारने से अंग्रेजी के उक्त शब्द वह अर्थ नहीं दे पाते, जो व्यापार में होता था। हालांकि, उद्योगपति की नौकरी छोड़ने के बाद मैंने भी सकार पर ध्यान नहीं दिया, परंतु सकारात्मक कहानी शब्द ने सोचने पर विवश कर दिया।

आशा है, कुछ विद्वान मेरा मार्गदर्शन अवश्य करेंगे।

सत्येंद्र सिंह

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