यादों में नीरज जी

 बात उन दिनों की है जब मैं रेल सुरभि, मध्य रेल की गृह पत्रिका का चयनित सहायक संपादक के पद पर कार्यरत था। मेरी मुंहबोली बहन सुमन सरीन धर्मयुग (तत्कालीन प्रतिष्ठित साप्ताहिक पत्रिका) में बतौर उप संपादक कार्यरत थी। वे लंच समय में टाइम्स भवन से मेरे पास महाप्रबंधक कार्यालय राजभाषा विभाग में लमच के लिए आती थीं। उनके साथ उनके कई साथी भी आते थे। उनके साथियों में कैलाश सैंगर का नाम विशेष उल्लेखनीय है, क्योंकि आगे चल कर उन दोनों का विवाह हुआ। उनके विवाह के समय तो मैं स्थानांतरित होकर जबलपुर चला गया था। लेकिन बात उससे पहले की है। 

     उन दिनों मैं कल्याण में रहता था। सुमन बहन ने कहा कि वे अँधेरी में एक कवि सम्मेलन करने जा रहे हैं और उसमें मुझे उपस्थित ही रहना है, क्योंकि उसमें नीरज जी आ रहे हैं।। आग्रह टालने का तो प्रश्न था ही नहीं। मैं वीटी से कल्याण न जाकर सीधे अँधेरी के उस स्कूल के ग्राउंड में पहुँच गया, जहाँ कवि सम्मेलन का आयोजन था। पहुँचा तो सुमन और कैलाश जी उपस्थित थे। वैसे उपस्थिति बहुत कम थी। उन दोनों ने मुझसे कहा कि वे तो कवि सम्मेलन में व्यस्त रहेंगे, इसलिए मुझे नीरज जी का ध्यान रखना है। मैं तो बहुत प्रसन्न हुआ क्योंकि नीरज जी का सान्निध्य पाना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि थी। शुरुआत में ही अपनी कविता पढ़ कर मैं दर्शकों में आ बैठा। जब नीरज जी का नाम कविता पाठ के लिए पुकारा जा रहा था तो वे मंच से नदारद थे। सुमन ने मुझे इशारा किया तो मैं मंच के पीछे गया। नीरज जी की उम्र काफी थी। वे लघुशंका के लिए मंच से पीछे की ओर नीचे उतरे तो उठ नहीं पा रहे थे। मैंने उन्हें सहारा देकर पीछे से मंच पर चढ़ा दिया। और वे मंच पर जो जमे, उसका तो वर्णन करना ही मुश्किल है। पर मैंने उन्हें छुआ, सहारा देकर मंच पर चढ़ाया, यही मेरे जीवन की एक उपलब्धि बन गई। आज न नीरज जी हैं, न सुमन जी हैं और न कैलाश जी। सुमन जी के जाने का तो मुझे समाचार ही नहीं मिला। कैलाश जी से कोरोना लॉकडाउन के दरम्यान बात हुई थी। वे मेरे कविता संग्रह "फ़र्क पड़ता है" पर प्रसन्नता व्यक्त कर रहे थे और कुछ दिनों बाद उनके स्वर्गारोहण का समाचार मिल पाया। उन दोनों के साथ तो मैं लंबे समय तक रहा परंतु उनके माध्यम से नीरज का कृपापूर्ण स्पर्श व आशीर्वाद प्राप्त हुआ, वह मेरे जीवन की एक धरोहर है।

सत्येंद्र सिंह

Comments

  1. मार्मिक संस्मरण ।

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  2. संस्मरण-अतित का सुंदर अनुभव साझा किया है

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  3. धन्यवाद पाठकजी, कविता जी।

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