सोच विचार और प्रगति
आजकल हर कोई किसी के बारे में कह देता है कि अमुक की सोत छोटी या बड़ी है। आखिर सोत होती क्या है। क्या विचार करना सोच होती है? क्या सोचना ही सोच है? किसी के बारे में राय बनाना सोच होती है? और हम दूसरों के बारे में सोचते ही क्यों है ंं दूसरा हमारे सामने जैसा आता है, उसी के अनुरूप हमारे मन में विचार आता है उसके बारे में। विचार आना मस्तिष्क की एक प्रक्रिया है। जो विचार अच्छे होते हैं, सभी के लिए हितकर हों, सभी के दिलों को जोड़त। हों, प्रेम पैदा करते हैं, ऐसे विचार ही उच्च कहलाते हैं। मैं समझता हूँ कि जिसके विचार उच्च होते हैं, उसी की सोच अच्छी होती है। सोच का मतलब किसी व्यक्ति व वस्तु के बारे में सोचना। इस सोच विचार का प्रतिफल प्रगति होती है। गति भी तीन स्तर की होती है - सामान्य, अधोगति व ऊर्ध्व गति। ऊर्ध्व गति ही प्रगति होती है। इसलिए हमारा कर्तव्य है कि अपनी सोच विचार को उच्च स्तर का बनाए रखते हुए प्रगति पथ पर सदा गतिमान रहें।
सत्येंद्र सिंह।
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