पं. रामकिंकर उपाध्याय -२

 पंडित रामकिंकर उपाध्याय जी पूछा कि मैं अपने आपको जानना चाहता हूँ, मेरा जन्म क्यों हुआ? इसी रूप में क्यों हुआ? और जीवन का उद्देश्य क्या है? वे सुनकर गंभीर हो गए। कुछ देर मौन रहकर बोले, इस सबके लिए साधना करनी पड़ेगी। मैंने कहा कि मैं प्रस्तुत हूँ, मैंने हाई स्कूल पास कर लिया है, उम्र भी कोई ज्यादा नहीं है और न कोई जिम्मेदारी है मेरे ऊपर इसलिए मैं साधना कर सकता हूँ। वे मौन हो गए और बोले इस विषय पर फिर कभी बात करेंगे। हम दोनों पैदल जन्मभूमि के लिए चल दिए। मेरे पास साइकिल थी पर उनके साथ रहते हुए साइकिल पर कैसे बैठ सकता था। यह बात करीब 1969-70 की होगी। पंडित जी प्रवचन करके चले गए और मैं उदरपूर्ति के लिए भरतपुर चला गया। फिर पंडित जी से मुलाकात तो हुई पर बात करने का अवसर नहीं मिला। और वे प्रश्न आज भी मेरे जेह्न में हैं।

सत्येंद्र सिंह

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